Monday, April 9, 2012

सौ कहानियाँ बनाने की छोटी कहानी

२०१२ की शुरुआत प्रथम बुक्स के लिए  एक नयी पहल के साथ हुई I


यह हमारा सौभाग्य रहा है की हमें प्रथम के संग बहुत सी नयी पहलों में हिस्सा लेने का मौका मिलता है I हमारे स्टोरी कार्डों की कहानी भी ऐसी ही है और  एक कहानी से कुछ कम दिलचस्प नहीं है I

 प्रथम ने लाखों नन्हे बच्चों के साथ काम के दौरान ऐसा महसूस किया सबसे छोटी किताब से भी छोटी कहानी बच्चों के बीच बाँटी जा सके तो उनकी पढने की रूचि में ज़रूर इजाफा होगा I ज़ाहिर सी बात है कि ऐसी छोटी कहानी का अपना एक उपयुक्त स्वरुप होना चाहिए I यह रंगीन होनी ही चाहिए क्योंकि  इसे बच्चे पसंद करेंगे I इसमें पढने के लिए ऐसी सामग्री होनी चाहिए जो रोचक हो पर साथ में ज्यादा लम्बी भी न हो की बच्चे इसे देख कर घबरा जाएँ I और साथ ही इसकी कीमत ऐसी हो कि हर संस्था और स्कूल को ऐसा लगे कि यह हर बच्चे को दी जा सकती है I

तो यहीं से हमारी स्टोरी कार्ड की यात्रा शुरू हुई जिसमे बहुत से दिल खुश करने वाले पड़ाव आ चुके हैं I हम एक अ ४ काग़ज़ पर कुछ रंगीन चित्रों के साथ एक छोटी कहानी छापते हैं जिसे लामिनेट भी किया जाता है और इसे एक बार मोड़ कर एक छोटी किताब की शक्ल मिल जाती है I

बिहार राज्य के सौ साल पूरे होने की ख़ुशी में प्रथम ने बच्चों के लिए कुछ करने की सोची I बिहार राज्य सरकार भी इस विचार को ले कर उत्साहित थी I यह तय हुआ की बच्चों के लिए सौ कहानी के कार्ड बनाये जाएँ I प्रथम बुक्स ने पहले पहल १० कार्ड का योगदान देने की सोची I बिहार सरकार की मदद से दो लेखन और चित्रांकन कार्यशालाएं आयोजित की गयीं जिसमे शिक्षकों, बच्चों, सरकारी अधिकारीयों, पत्रकारों ने भाग लिया I इसमें से चुनिन्दा कहानियों की छंटाई,  संपादन , संशोधन का कार्य शुरू हुआ I सब कहानियां बिहार के लोगों ने बिहार के बच्चों के लिए लिखीं I साथ ही, चित्रकारों ने इनके लिए चित्रांकन भी शुरू कर दिया I प्रथम बुक्स के पास कुछ सामग्री पहले से मौजूद थी जो बिहार में २००८ में कक्षा १ व २ के लिए पुस्तक खरीद के बाद तैयार करी गयी थी I बिहार में आयी बाढ़  के अनुभव को बच्चों ने बखूबी अपनी लेखनी में उतारा  था I सब कुछ मिला कर प्रथम बुक्स २४ स्टोरी कार्ड तैयार करने में सफल हुआ. हमारा स्टोरी कार्ड बनाने का अनुभव अन्य कार्ड बनाने में भी काम आया. इस प्रकार एक आकर्षक लाल लिफाफे में पटना में मार्च २२ को बिहार के बच्चों को सौ स्टोरी कार्ड का तोहफा मिला I

यह सरकार के साथ मिल कर बच्चों के लिए बेहतरीन  और अलग किस्म का काम करने का एक सुनहरा उदाहरण  पेश करता है I बच्चों की ज़रूरतों को देखते हुए  उपयोगी व वाजिब दाम की पठन सामग्री बनाने की इस पहल से अन्य राज्यों में भी इसका अनुसरण हो सकता है I हमारी यह आशा है की हम आगे भी ऐसे काम करेंगे और हर बच्चे  के हाथ किताब पहुँचाने का अपना प्रयास जारी रखेंगे I

- मनीषा चौधरी 

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