Wednesday, September 8, 2010

Book Review : Jhilmil

Earlier this month, we were giving out review copies of few of our books. We were excited to hear what all of you thought of our books (the good things and the bad things!) and hope that this feedback from people (educators, parents, book lovers, children) will help us create better books and help you choose books for your own kids.

Our first book review comes from Mr.Faiq Gazdhar who received our book Jhilmil (Hindi).
झिलमिल- समीक्षा

किताबों से मोह अगर बचपन में ही हो जाये तो आगे आसानी रहती है. बच्चों को पढने की आदत अगर एक बार लग गयी, तो फिर बस अपनेपसंद के विषय की किताब मिलने पर दीन दुनिया भूल कर जुट जातेहैं. बढ़प्पन आने पर समय निकालना थोडा मुश्किल रहता है लेकिनकिताबों के प्रति प्रेम कम नहीं होता.
झिलमिल पढ़ कर ऐसा लगा जैसे मैंने एक बार फिर से बचपन का एकचक्कर लगा लिया. जैसे फिर से पहला प्यार हुआ हो. अपने बचपन मैंमैंने भी ऐसी ही किताबों से शुरुआत की थी. हिंदी और अंग्रेज़ी कीवोह किताबें कवितायेँ और छोटी कहानियां चित्रों के साथ सुनती थी.

झिलमिल में श्री दामोदर अगरवाल की कुछ कविताओं का संकलन है. यह कवितायेँ रोज़मर्रा की चीज़ों, बातों और घटनाओ का चित्रणकरती हैं. कव्वे, चीते, मुर्गे, घोड़े, बादल, मेला, पानी, आलू, चाँद, इन कवितायों मैं इन सब का ज़िक्र है. थोडा विज्ञान है,जैसे कैसे हवापानी चुरा कर भाग जाती है. थोडा ज्ञान है, जैसे कैसे मुर्गा रोज़ रोज़की कूकढ़ककू से परेशान हो कर राम नाम भजने की सोच रहा है. थोड़ी इच्छा है, की इन्द्रदेव का अड़ियल घोडा थोड़ी बरसात गिरा दे. थोडासपना है, जैसे कैसे चाँद दही का मटका है. आसान शब्दों वाली यह कवितायेँ, पढने वाले बच्चों को कविता से परिचित करवाती हैं और खुदकविता करने को प्रेरित करती हैं.

चित्रांकन की जितनी तारीफ़ की जाये कम है. हर कविता का जैसे सन्दर्भ चित्रों से लिखा हो. देखने मैं मज़ेदार और खूबसूरत. चित्रों के होते येकवितायेँ सात साल से छोटे बच्चों को भी सुनाई, पढ़ाई जा सकती है. रंगों से भरपूर चित्रकारी की है श्वेता महोपात्रा ने. नीला रंग थोडा हावीहै, पर मैं शिकायत नहीं कर रहा.
इसे पढ़ कर बच्चे अपने आसपास की कुछ बातें और ज्यादा अच्छे से जानेंगे, थोड़ी ज़िद और बहुत सवाल करना और सपने देखना सीखेंगे. और हम जैसे आलसी बड़े लोग, कुछ देर अपने बचपन को जियेंगे और अपने आसपास के बच्चों को किताबों से परिचित करवाएंगे.

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