प्रथम बुक्स के ब्लागस्पाट पर पहली बार कुछ लिखने में पहली बार पहाड़ चढ़ने में जो मज़ा आता है, कुछ वैसा ही महसूस हो रहा है!
कुछ रोमांच, कुछ उलझन और एक नया अनुभव आत्मसात करने का सुख।
प्रथम बुक्स भारतीय भाषाओं में अच्छा बाल साहित्य उचित दम पर प्रकाशित करने व उपलब्ध कराने की दिशा में एक बहुत ही सामयिक पहलऐ है। हर बच्च को अच्छी पुस्तकें पढने का हक है, ऐसा हमारा मानना है। आज के दौर में, प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भारत क्यों इतना पिच्चादअ है, बच्चों की शिक्षा में आनंद का सर्वथा आभाव क्यों है, क्यों बच्चे सरकारी तंत्र के स्कूलों में अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, यह सवाल हम सब के सामने हैं। सरकार, गैर सरकारी संस्थाएं, निति विशेषज्ञ, स्चूली तंत्र सभी आने वाली पीढ़ी के आगे जवाबदेह हैं की शिक्षा उनके जीवन को सवंरे, मानसिक, बौधिक, शारीरिक व मनोवैज्ञानिक विकास का मौका हर स्चूली बच्चे को बराबरी से मिले।
किताबों के एक बच्चे के जीवन में महत्व को सिद्ध करने के लिए में शोध, आंकडों या सरकारी फाइलों में बंदह पड़े तथ्त्यों को में दोहरा कर आपको उबऊंगी नहीं।
जिस भाषा के माध्याँ से बच्चा शिक्षा ग्रहण कर रहा है, उसी भाषा में उसे पत्थ्य पुस्तक के अलावा कल्पनाशील पठन सामग्री मिलनी ही चाहिए। इसी से बच्चे में जन्क्जारी , ज्ञान की स्वयम खोज करने का जज्बा पैदा होगा जो की स्वतः शिक्षा का उद्देश्य है . मन की पतंग की डोर खुलऐ आसमान में उडे , यही प्रथम बुक्स की किताबों की कोशिश है.
बल साहित्य प्रकाशन , पठन , लेखन , चित्रांकन , पुस्तकालय , शिक्षा , लेखन की त्रासदी और सुख ...किसी भी विषय पर आप इस ब्लॉग पर अपने विछार पोस्ट करें टू आपका स्वागत है !
कुछ रोमांच, कुछ उलझन और एक नया अनुभव आत्मसात करने का सुख।
प्रथम बुक्स भारतीय भाषाओं में अच्छा बाल साहित्य उचित दम पर प्रकाशित करने व उपलब्ध कराने की दिशा में एक बहुत ही सामयिक पहलऐ है। हर बच्च को अच्छी पुस्तकें पढने का हक है, ऐसा हमारा मानना है। आज के दौर में, प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भारत क्यों इतना पिच्चादअ है, बच्चों की शिक्षा में आनंद का सर्वथा आभाव क्यों है, क्यों बच्चे सरकारी तंत्र के स्कूलों में अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं, यह सवाल हम सब के सामने हैं। सरकार, गैर सरकारी संस्थाएं, निति विशेषज्ञ, स्चूली तंत्र सभी आने वाली पीढ़ी के आगे जवाबदेह हैं की शिक्षा उनके जीवन को सवंरे, मानसिक, बौधिक, शारीरिक व मनोवैज्ञानिक विकास का मौका हर स्चूली बच्चे को बराबरी से मिले।
किताबों के एक बच्चे के जीवन में महत्व को सिद्ध करने के लिए में शोध, आंकडों या सरकारी फाइलों में बंदह पड़े तथ्त्यों को में दोहरा कर आपको उबऊंगी नहीं।
जिस भाषा के माध्याँ से बच्चा शिक्षा ग्रहण कर रहा है, उसी भाषा में उसे पत्थ्य पुस्तक के अलावा कल्पनाशील पठन सामग्री मिलनी ही चाहिए। इसी से बच्चे में जन्क्जारी , ज्ञान की स्वयम खोज करने का जज्बा पैदा होगा जो की स्वतः शिक्षा का उद्देश्य है . मन की पतंग की डोर खुलऐ आसमान में उडे , यही प्रथम बुक्स की किताबों की कोशिश है.
बल साहित्य प्रकाशन , पठन , लेखन , चित्रांकन , पुस्तकालय , शिक्षा , लेखन की त्रासदी और सुख ...किसी भी विषय पर आप इस ब्लॉग पर अपने विछार पोस्ट करें टू आपका स्वागत है !


Pratham Books Virdhawal Khade par kitaab kyon prakashit kar rahi hai?
ReplyDeleteVirdhawal ne solah saal ki kam umr mein na sirf tairaki mein naye keertimaan banaye hain balki is baat ko bhi siddh kar diya hai ki yadi aap lagan se apne chune huey kshetra mein kaam karte jayen to aapko sambal dene waale log bhi aapke saath judte hain. Aap akele nahin hain aur aapki mehnat aapko saphalta ki raah par pahunchati hai. Vir ki vir gaatha zaroor aur pratibhavaan bacchon ke liye prerana banegi.